Dhat Rog Ko Thik Karne Ke Ayurvedic Nuskhe Kya Hai

Dhat Rog Ko Thik Karne Ke Ayurvedic Nuskhe Kya Hai

धात रोग को ठीक करने के आयुर्वेदिक नुस्खे क्या हैं?

धात रोग क्या होता है?

पुरूषों में धात गिरने की समस्या यानी धात रोग को अंग्रेजी भाषा में spermatorrhea के नाम से पुकारा जाता है। यह समस्या आज युवाओं में पाये जानी एक आम समस्या बन गई है। ऐसा नहीं है कि यह रोग केवल युवाओं में ही देखने को मिलता है, बल्कि अधिक उम्र के लोगों में भी यह समस्या देखी जा सकती है। लेकिन धात रोग से पीड़ित ज्यादातर कम उम्र के नौजवान ही होते हैं। धातु रोग की समस्या में बिना उत्तेजना व कामेच्छा के भी वीर्य जरा-जरा सी मात्रा में निष्कासित होता रहता है। विशेषकर मल-मूत्र के दौरान ऐसा होता है। मूत्र के दौरान और मल त्याग के दौरान जरा-सा दबाव देने पर शिश्न से कुछ बूंदे गाढ़ा पतला द्रव निकलता है और ऐसी क्रिया को ही हम धात रोग के नाम से जानते हैं।

आइए हम आपको बताते हैं धात रोग के कारण और आयुर्वेदिक इलाज..

धात रोग के कारण-

दुर्बल धमनियां, शरीर में गर्मी अधिक होना, कब्ज़ की शिकायत रहना, हॉर्मोनल चेंज, गरम पदार्थ अधिक खाना, अंडकोष की सूजन, हस्तमैथुन इस रोग की मुख्य वजह होती है, जिसकी वजह से लिंग की नसें कमजोर हो जाती हैं और धात रोग सताने लगता है, गुप्त रोग होना, शरीर में पोशाक तत्वों की कमी, मदिरापान व अन्य प्रकार के नशे करना, गलत संगति में रहना, अश्लील साहित्य पढ़ना, देखना या सोचना।

आप यह हिंदी लेख dhatrog.com पर पढ़ रहे हैं..

धात रोग की आयुर्वेदिक चिकित्सा-

dhatrog.com

1. गोन्द कीकर, बीजबन्द, मग़ज तुख़्मतम्र हिन्दी, कमरकस, अजवायन खुरासनी, प्रत्येक 10 ग्राम, छोटी चन्दन की जड़ के छिलके का चूर्ण 100 ग्राम, कलई भस्म भगवाली, लोह भस्म जामुन वाली, अण्डे के छिलके की भस्म, सत शिलाजीत सूर्यतापी प्रत्येक 25 ग्राम, त्रिफला 30 ग्राम, छोटी इलायची दाना 10 ग्राम, सफेद सन्दल का चूर्ण 10 ग्राम। सबको मिलाकर 10 ग्रेन वजन की गोलियां तैयार करें। 1 से 2 गोली सुबह-शाम ताजा पानी अथवा दूध के साथ प्रयोग करें। यह योग धात की समस्या के लिए बहुत उपयोगी है। साथ ही वीर्य विकार को भी नष्ट करता है, स्वस्थ बनाता है।

2. सत शिलाजीत सूर्यतापी 100 ग्राम, जायफल 100 ग्राम, छोटी इलायची 100 ग्राम, कलई भस्म 25 ग्राम, शीतल चीनी 100 ग्राम, रूब्बूलसूस 100 ग्राम, वंशलोचन 50 ग्राम, त्रिकुटा 10 ग्राम, शकाकुल मिश्री 10 ग्राम, तालमखाना 100 ग्राम, जावित्री 100 ग्राम, त्रिफला 100 ग्राम, सत बिरोजा 100 ग्राम, सालबमिश्री 100 ग्राम, कुशता मरजान 100 ग्राम, कुश्ता सदफ मर्वारीद 25 ग्राम तथा बीजबन्द 100 ग्राम। सब औषधियों को कूट-छानकर शतावरी के रस में 24 घण्टे तक खरल करके बेर की गुठली के बराबर गोलियां तैयार करके छाया में शुष्क करें। एक से दो गोली सुबह व शाम दूध या पानी के साथ दें। वीर्य प्रमेह व स्वप्नदोष का सर्वश्रेष्ठ योग है। शारीरिक कमजोरी, काम में मन न लगना, सिर दर्द, कमर दर्द, जोड़ों का दर्द तथा मन्दाग्नि में लाभप्रद है।

3. इमली के बीज 125 ग्राम दूध में भिगो दें, फूलने पर छिलके उतार लें। फिर इन छिली हुई इमली के बीजों को तोल कर खरल में डालकर ऊपर से उतनी ही मिश्री डालकर घोटें। अच्छी प्रकार पिस जाने पर जंगली बेर के समान गोलियां बना लें। सुबह-शाम एक-एक गोली खाने से स्वप्नदोष का रोग दूर हो जाता है। गर्म एवं भारी पदार्थों से परहेज़ करें।

4. जिन लोगों का मसाना कमज़ोर हो और रात्रि को बुर स्वप्न अथवा बिना किसी स्वप्न के वीर्यपात हो जाता हो, उनको जामुन की गुठली का चूर्ण 3-3 ग्राम सुबह-शाम पानी के साथ खाना चाहिए।

Dhat Rog Ko Thik Karne Ke Ayurvedic Nuskhe Kya Hai

5. ईसबगोल का छिलका 3 ग्राम दिन में दो बार दूध के साथ लेने से धातु रोग दूर हो जाता है।

6. कीकर की ऐसी फलियां जिनमें अभी बीज न पड़ा हो, शुष्क करके पीस लें। 6 ग्राम यह चूर्ण और 6 ग्राम कूज़ा मिश्री सम्मिलित करके गाय के दूध के साथ खाने से वीर्य प्रमेह दूर हो जाता है।

7. पतले वीर्य को गाढ़ा बनाने वाली नामवर चीजें- मोचरस, दोनों मूसली, सेमर की मूसली, बबूल का गोंद, वंशलोचन, शतावर, मखाने, असगन्ध, बीजबन्द, रूमी मस्तगी, काले तिल, लसीढ़े, लाजवन्ती के बीज, ईसबगोल की भूसी आदि हैं।

8. सेमल के फूल, शीतल चीनी, बंग भस्म, गिलोय सत्व दो-दो तोला घोंट के रखें। एक से डेढ़ माशा की मात्रा में सुबह-शाम शहद में चाटने से स्वप्नदोष से मुक्ति मिलती है।

9. धतूरे के बीज, काली मिर्च, समुन्द्र सोख, सफेद मूसली, सेमल की छाल, बहुफली, मैदा लकड़ी प्रत्येक 10 ग्राम, ब्रह्मडण्डी, संखाहूली, कुलंजन, रेगमाही प्रत्येक 20 ग्राम, भांग के बीज, मस्तगी प्रत्येक 30 ग्राम। सबको बारीक पीसकर शहद की सहायता से गोलियां बना लें। 3 ग्राम भैंस के दूध के साथ सेवन करने से वीर्य प्रमेह का रोग दूर हो जाता है। यह योग प्रत्येक मौसम में लाभदायक है।

10. कौंच के बीज की गिरी, खीरे के बीज की गिरी, बीजबन्द, केसर, मोती बिना छिद्र के प्रत्येक 10 ग्राम, ऊँटकटारा की जड़, आक की जड़, जुन्दबेदस्तर प्रत्येक 6 ग्राम, पान के पत्तों का रस निकाल कर गोलियां बना लें। 4 ग्राम भैंस के दूध के साथ केवल सर्दियों में प्रयोग करने से धात रोग पूरी तरह समाप्त हो जाता है।

11. बंग भस्म दो-दो रत्ती लेकर सुबह-शाम गुलकन्द में चाटने से स्वप्नदोष दूर होता है।

सेक्स समस्या से संबंधित अन्य जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें..http://chetanonline.com/

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *