Dhat Rog Door Karne Ke Liye Desi Gharelu Upchar

Dhat Rog Door Karne Ke Liye Desi Gharelu Upchar

धात रोग दूर करने के लिए देसी घरेलू उपचार

धातु रोग में वीर्य का महत्व-

धातु रोग की समस्या में पुरूषों द्वारा मल व शौच त्याग के समय हल्का सा जोर देने पर भी वीर्यनुमा द्रव्य लिंग मुख पर आकर रिसने लगता है। इस समस्या में पुरूष सुस्ती व कमजोरी महसूस करता है, कभी-कभी चिड़चिड़ाहट भी होती है, कम परिश्रम में थकावट होने लगती है, आंखों के नीचे कालापन आने लगता है इत्यादि कई लक्षण दृष्टिगोचर होने लगते हैं।
धात रोग में यदि वीर्य को स्वस्थ, गाढ़ा, बलशील रखा जाये तो इससे भी धात गिरने की समस्या में सुधार होता है। वीर्य का पतलापन भी इस समस्या का कारण बनता है।

वीर्य को गाढ़ा बनाने के योग-

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1. मोचरस 50 ग्राम, बबूल की कच्ची फलियां(जिन्हें छाया में सुखाया गया हो) 50 ग्राम, शतावर 50 ग्राम एवं मौलसरी की सूखी छाल 50 ग्राम। कूट-छानकर 200 ग्राम मिश्री पीसकर मिला लें। इसमें से 5 ग्राम चूर्ण फांक कर ऊपर से दूध पीने से कैसा ही पतला वीर्य हो, गाढ़ा हो जाता है। परीक्षित योग है।

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2. बरगद के पेड़ की कोपलें 3 ग्राम, गूलर के पेड़ की छाल 3 ग्राम तथा मिश्री 6 ग्राम। सिल पर पीसकर लुगदी बना लें। यह एक मात्रा है। धीरे-धीरे खाकर ऊपर से दूध पी लें। 40 दिन में अद्भुत चमत्कार दिखायेगा। इससे पतला वीर्य गाढ़ा हो जाता है।

3. मोचरस ढाई तोला, मिश्री आधा पाव। इनको कूट-पीसकर सात मात्रायें बना लें। एक-एक मात्रा सुबह-शाम दूध से लें। हर बार ही नया बनाते जायें। 41 दिन में धातु विकार एवं शुक्र तारल्य मिटेंगे।

4. कौंच के कच्चे बीज छाया में सुखा लें। सूखने पर पीसकर छान लें। 5 से 10 ग्राम तक 250 मि.ली. गाय के दूध में डालकर उबालें, पक जाने पर पी लें। इसके प्रयोग से वीर्य गाढ़ा होता है, संभोग इच्छा बढ़ती है और प्रसंग में देर लगती है। धातु रोग में भी चमत्कारिक फल दिखता है।

5. मौलसरी की छाल, ढाक के पेड़ की छाल, सेमल की मूसली, बबूल का गोंद, गूलर का गोंद, भुने चने, ढाक का गोंद, सेमल का गोंद, गूलर की छाल। कूट-छान लें। 5-6 ग्राम सुबह-शाम गाय के दूध के साथ पीने से निश्चय ही धातु गाढ़ा होता है एवं प्रसंग में देर लगती है। कम से कम एक माह तक प्रयोग करें।

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6. सूखी शकरकन्द कूटकर घी और चीनी के साथ हलुआ बनाकर खाने से वीर्य शक्तिशाली और गाढ़ा होता है।

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7. कीकर का घी में भुना हुआ गोंद 250 ग्राम लेकर सिल पर पीस लें। इसमें असगन्ध नागौरी 125 ग्राम कूट-छानकर भली-भांति मिला लें।
3 से 5 ग्राम चूर्ण(पाचन शक्ति के अनुसार) मधु में मिलाकर प्रयोग करने से सभी तरह के वीर्य विकार दूर हो जाते हैं एवं वीर्य गाढ़ा हो जाता है।

8. बढ़ वृक्ष के पके लाल रंग के फल एवं पीपल के फल दोनों समान मात्रा में छाया में सुखाकर बारीक चूर्ण बना लें। यह चूर्ण 25 ग्राम लेकर उसमें 25 ग्राम चीनी तथा 125 ग्राम दूध मिलाकर सुबह-शाम कुछ दिनों तक सेवन करने से पतला वीर्य भी गाढ़ा हो जाता है।

9. इमली के बीज की गिरी का चूर्ण बना लें। नित्य 3 ग्राम फांककर गर्म दूध पी लें। इसके सेवन से वीर्य गाढ़ा होकर पुष्ट हो जाता है और धात गिरने की समस्या भी नहीं रहती है।

10. तुलसी के बीजों का चूर्ण 3 ग्राम, पुराना गुड़ 3 ग्राम मिलाकर दूध के साथ खाने से वीर्य गाढ़ा होता है।

11. समुन्द्रसोख के बीज 3 ग्राम खाने से वीर्य गाढ़ा होता है, शरीर पुष्ट होता है, शीघ्रपतन रोग दूर हो जाता है।

12. स्वर्णमाक्षिक भस्म 2-2 रत्ती, दूध से लें। इससे धातुक्षीणता, कमज़ोरी हटेगी।

13. उटंगन के बीज 3 ग्राम पीसकर लेने से वीर्य गाढ़ा होता है तथा नपुंसकता एवं शीघ्र स्खलन का होना रूक जाता है।

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