Dhat Ki Dawa

Dhat Ki Dawa

धात की दवा

धातु का कमजोर होना अथवा धात गिरना-

Dhat Ki Dawa, Dhat Ki Dawa Patanjali, Spermatorrhea

आज की भागदौड़ और रेलमपेल दुनियां में अधिकतर पुरूष कई प्रकार की गुप्त समस्याओं से पीड़ित हैं, जिनके लिए उनकी गलत दिनचर्या और असंयमित आहार, खानपान जिम्मेदार है। इस हिंदी लेख में हम पुरूषों को होने वाली गुप्ता समस्या ‘धात रोग’ के बारे में और उसके उपचार के बारे में चर्चा करेंगे। वीर्य का पतलापन या धातु विकार के कारण, बहुत ज्यादा कामुक विचारों, अश्लील फिल्में देखना, गंदी पुस्तक पढ़ना या फिर अपनी हवसपूर्ति की अधिकता में अप्राकृतिक मैथुन की आदत को अपनाने से भी धातु दुर्बलता हो जाती है।
अगर व्यक्ति को धातु विकार व धातु दुर्बलता की समस्या आने लगे, तो इस समस्या के कारण व्यक्ति शीघ्रपतन से भी पीड़ित हो जाता है, धात गिरने लगती है, लिगं में पूरी तरह से तनाव नहीं आ पाता आदि समस्या हो जाती है।

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धात रोग व धात विकार के प्रमुख कारण-

1. धात विकार, धातु दुर्बलता व धात गिरना इन समस्याओं की वजहों में एक खास वजह है अत्यधिक मानसिक तनाव में रहना, किसी गहरे दुख का होना। दरअसल बहुत ज्यादा तनाव में रहने के कारण व्यक्ति के अंदर धातु विकार उत्पन्न होने लगता है, जैसे वीर्य का पतला होना।

2. कोई पुराना शारीरिक रोग जिसका उपचार लंबे समय से चल रहा हो या शारीरिक कमजोरी की वजह से भी पुरूषों को धात गिरने की समस्या हो जाती है।

3. आहार में पौष्टिक भोजन नहीं लेने से भी धात रोग व वीर्य पतला हो जाता है, वीर्य विकार शुरू हो जाते हैं। दरअसल पौष्टिक आहार हमारे शरीर में रस, खून, मेद, माँस, अस्थि, मज्जा और शुक्र के निर्माण में बहुत सहायक होते हैं। इसलिए पौष्टिक आहार का सेवन जरूरी है। पौष्टिक आहार में आप जैसे-दूध, घी, दही, मेवा व दालें आदि को शामिल कर सकते हैं और धातु विकार से बच सकते हैं।

4. बहुत ज्यादा गरम व तेज मिर्च-मसालों वाला भोजन करने से भी धातु विकार होना आरम्भ हो जाते हैं।

5. जो पुरूष ऐसे चीजें अधिक सेवन करते हैं, जो शरीर में कामवासना को भड़काने का काम करते हैं, उन्हें धातु विकार व धातु रोग से दो-चार होना पड़ सकता है। कामोत्तेजक चीजें जैसे- माँस व मदिरा, लहसुन, काॅफी व चाय आदि का सेवन।

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धात रोग व धातु विकार के लक्षण-

शारीरिक कमजोरी, दिमागी क्षीणता और थकान, स्वभाव में चिड़चिड़ाहट आ जाना, रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर जाती है, जिससे रोग जल्दी घेर लेता है। इसके अतिरिक्त धातु विकार के कारण सेक्स में प्रति अरूचि होने लगती है, क्योंकि कामशक्ति घटने लगती है, शरीर के सभी अंग जल्दी थक जाते हैं, आलस्यपन छाया रहता है, किसी भी काम में मन नहीं लगता है, पेट से संबंधित रोग होने लगते हैं, स्नायु दुर्बलता, खाँंसी आदि समस्या उत्पन्न हो जाती है।

धात रोग के लिए घरेलू उपचार-

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1. यदि प्रतिदिन पपीते का जूस पीये जाये तो धातु दुर्बलता का नाश होता है।

2. कच्चा आंवला भी धात रोग में बहुत कारगर औषधि साबित होता है। इसके लिए कच्चे आंवला लेकर उसका रस अच्छे से निकाल लें। सुबह खाली पेट इस रस को मधु के साथ लें। गजब का फायदा पहुंचेगा।

3. धात रोग से छुटकारा पाने के लिए यह योग बहुत हितकारी है। योग इस प्रकार तैयार करें। आपको आटा लेना है, जोकि उड़द की दाल का हो। इस आटे को भली-भाँति देसी घी में भून लें। भुन जाने के बाद इसमें देसी खांड मिला लें और लड्डू तैयार कर लें। इन तैयार लड्डुओं को रोजाना खाने से धात की समस्या हमेशा के लिए नष्ट हो जाती है।

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4. 3 ग्राम तुलसी के बीजों को मिश्री के साथ मिलाकर प्रतिदिन दोपहर को भोजनोपरान्त खाने से धातु क्षीणता, वीर्य का पतलापन और धात विकार दूर हो जाते हैं।

5. धातु रोग को हमेशा के लिए अलविदा कहने के लिए रोजाना बादाम, जावित्री व इलायची का सेवन करें। बहुत गुणकारी योग है।

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6. बहुत जल्दी सुबह जगने के बाद लहसुन की कच्ची कलियों का यदि भैंस के दुग्ध के साथ सेवन किया जाये जो धातु दुर्बलता दूर होती है। 15 दिन में ही असर दिखाई देेने लगता है।

7. शतावरी और अश्वगंधा का मिश्रण तैयार करके रोजाना रोगी को सेवन कराने से रोगी के कष्ट में यानी धात गिरने की समस्या में आराम पहुंचता है।

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