Ye Hain Dhat Rog Ke Liye Labhkari Ayurvedic Nuskhe ये हैं धात रोग के लिए लाभकारी आयुर्वेदिक नुस्खे

Ye Hain Dhat Rog Ke Liye Labhkari Ayurvedic Nuskhe ये हैं धात रोग के लिए लाभकारी आयुर्वेदिक नुस्खे

धात रोग, प्रमेह (Spermatorrhoea)-

पाचन विकारों के कारण वृक्कों में क्षारीय वस्तुओं की मात्रा बढ़ जाती है। वृक्कों के छिद्र क्षार की अधिकता से आंशिक रूप से गलकर चैड़े हो जाते हैं, जिससे वृक्क पहले की भांति कार्य नहीं करते हैं। अतः अजीर्ण या अपच से बिना पचे पदार्थ मूत्र के साथ अनेक रंगों में निकलते हैं, जिसे प्रमेह, धात गिरना कहते हैं। यह बदहज़मी, पाचन संस्थान के साथ-साथ वात, पित्त और कफ को भी कुपित कर देते हैं। ये तमाम कारण प्रमेह के लिए अनुकूल होते हैं। अति मैथुन और हस्तमैथुन से भी पाचन संस्थान में विकृति आ जाती है।

Ye Hain Dhat Rog Ke Liye Labhkari Ayurvedic Nuskhe

आयुर्वेदिक उपाय-

Ye Hain Dhat Rog Ke Liye Labhkari Ayurvedic Nuskhe

1. अंकोल के फूल की सुखाई हुई कलियां, सूखे आंवले का चूर्ण और हल्दी का चूर्ण 25-25 ग्राम तीनों को मिश्रित कर लें। 3-3 ग्राम शहद के साथ नित्य सुबह-शाम लें। इससे प्रमेह में लाभ होता है। यह योग प्रमेहनाशक चूर्ण के नाम से भी जाना जाता है।

2. पिसी हल्दी और शहद को अभ्रक भस्म के साथ लेने से प्रमेह में आराम आ जाता है।

3. प्रमेह के रोगी को गिलोय(गुरूच) का सत्तू, मिश्री और अभ्रक भस्म समभाग मिलाकर लेने से लाभ होता है।

4. शुद्ध शिलाजीत, पीपल का चूर्ण, स्वर्णमाक्षिक भस्म और अभ्रक भस्म लेने से लाभ होता है।

5. हल्दी और त्रिफला चूर्ण के साथ अभ्रक भस्म लेने से धातु रोग में लाभ होता है।

6. इलायची, गोखरू, भुई आंवला, मिश्री और शहद को अभ्रक भस्म के साथ लेने से प्रमेह और मूत्रकृच्छ में लाभ होता है।

7. अमलतास के पत्तों और जड़ का क्वाथ पीने से हरिद्रा प्रमेह में लाभ होता है।

8. ऊँटकटारा की जड़ की छाल पीसकर लें। मुगली वेदना 10 ग्राम और मिश्री 20 ग्राम को रात को पानी 250 मि.ली. में भिगो दें। सवेरे उस पानी को छानकर उपरोक्त चूर्ण 6 मिलाकर पीने से पुराना प्रमेह और सुज़ाक ठीक हो जाता है।

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9. ऊँटकटारा की जड़ की छाल 3 ग्राम, गोखरू 3 ग्राम और मिश्री 6 ग्राम को पीसकर सुबह-शाम दूध के साथ लेने से प्रमेह में लाभ होता है।

10. कन्दूरी(कन्दौरी) की जड़ की छाल का ताजा रस नित्य 10 मि.ली. प्रातःकाल पीने से प्रमेह और बहुमूत्र में लाभ होता है।

11. कबाबचीनी का चूर्ण 650 मि.ग्रा. और फिटकरी 650 मि.ग्रा. प्रतिमात्रा मिलाकर नित्य 3 बार लेने से पुराना प्रमेह और सुज़ाक ठीक हो जाता है।

12. कबाबचीनी 25 ग्राम, शक्कर 25 ग्राम, नारंगी का शर्बत 7 मि.ली. और पानी एक औंस प्रतिमात्रा नित्य सुबह-शाम पीने से लाभ होता है।

13. काठगूलर(कठूमेर) का क्वाथ और आसव के सेवन से मूत्र के तमाम रोग, सुज़ाक, वीर्यस्राव और पित्त प्रमेह में लाभ होता है।

14. काठ गूलर(कठूमर) की बड़ी जाति के फलों के सेवन से प्रमेह और रक्तप्रदर में लाभ होता है।

15. हरी पिप्पली का चूर्ण और लौह भस्म शहद के साथ नित्य सुबह-शाम लेने से लाभ होता है।

16. त्रिफला चूर्ण को लौह भस्म के साथ लेने से प्रमेह मंे लाभ होता है।

17. पान और मिर्च के साथ लौह भस्म नित्य दो बार लेने से प्रमेह में लाभ होता है।

18. कुन्नी घास(वनकाउन) का चूर्ण 6-6 ग्राम शक्कर मिलाकर नित्य 3 बार लेने से प्रमेह में लाभ होता है।

19. खिरनी खाने से चेतना शक्ति जागृत होती है। उल्टी, वायुनलियों का प्रदाह, जीर्ण, प्रमेह और मूत्र संबंधी विकारों में लाभ होता है।

20. गिलोय(गुरूच) का शीत निर्यास सुबह-शाम सेवन करने से प्रमेह में लाभ होता है।

21. गूलर के दूध में बावची के बीज भिगो कर और पीसकर लेप करने से हर प्रकार की पीड़िका और व्रणों में लाभ होता है।

22. शमी(सफेद कीकर, छोंकर) की कोमल कोपलें 10 ग्राम और जीरा 3 ग्राम मिलाकर बारीक पीसकर गाय का कच्चा दूध 250 मि.ली. में मिलाकर कपड़े से छानकर सफेद जासूद की जड़ 5 ग्राम और मिश्री 25 ग्राम मिलाकर पी लें। इस प्रकार 14 दिन पीने से प्रमेह में लाभ होता है।

Ye Hain Dhat Rog Ke Liye Labhkari Ayurvedic Nuskhe

23. नीम बकायन के बीजों को चावलों के पानी में पीसकर घी मिलाकर नित्य सुबह-शाम पीने से पुराने प्रमेह में लाभ होता है।

24. पीपल वृक्ष(अश्वत्थ) की छाल का काढ़ा पीने से पित्तज और प्रमेह में लाभ होता है।

25. मूत्र के साथ धातु आये या स्वप्नदोष से वीर्यपात हो तो बहुफली के ताजा पौधे को थोड़े से पानी के साथ पीसकर कपड़े में दबाकर रस निकाल लें। रस 1 औंस में शक्कर 10 ग्राम और पीपल का चूर्ण 700 मि.ग्रा. मिलाकर नित्य सुबह-शाम पीना चाहिए। यदि ताजी बहुफली न मिले तो सूखी बहुफली को कूटकर पानी में दो घंटे भिगो कर छानकर इस लुआब में ही पीपल का चूर्ण मिलाकर दें।

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