Dhatu Vikar Ko Door Karne Ka Upchar धातु विकार को दूर करने का उपचार

Dhatu Vikar Ko Door Karne Ka Upchar धातु विकार को दूर करने का उपचार

धातु विकार- (Spermatorrhea)

धातु नष्ट होने से या फिर धात विकार के कारण पुरूष को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इससे लिंग की शिथिलता के साथ-साथ यदि वीर्य का पतलापन और क्षरण भी हो तो इसे धातु दुर्बलता कहते हैं।

धातु दुर्बलता के कारण-

1. यदि किसी का स्नायुतंत्र एवं पाचनतंत्र एक साथ प्रभावित हो, कई रोगों से ग्रस्त हो, तो इस रोग की संभावना बढ़ जाती है।

2. भय, शोक, चिंता आदि भी इस रोग के कारण हैं।

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3. ज्यादा मात्रा में खट्टे, तेज मसालेदार, चटपटा आहार लेने से भी धात दुर्बलता की समस्या पुरूषों में उत्पन्न हो जाती है।

4. अधिक व्रत रखना, पोषाहार की कमी होना आदि भी इसके कारण हैं, क्योंकि इनके अभाव मेें सुपाच्य आहार नहीं मिलने से शरीर धीरे-धीरे दुर्बल हो जाता है और उचित मात्रा में वीर्य नहीं बन पाता है। पुष्ट वीर्य नहीं होने से(पतला वीर्य होने से) क्षरित होता है। मल-मूत्र करते समय भी वीर्य निकल जाता है, अतः इस रोग की चिकित्सा में चिकित्सक को रोगी के स्नायुतंत्र एवं पाचनतंत्र को स्वस्थ करने की ओर पहले ध्यान देना चाहिए।

5. जिन पुरूषों के मन में हर वक्त अश्लील विचार, चिंतन रहता है या फिर हर वक्त दिमाग में किसी सुुंदर स्त्री के नग्न अंग-प्रत्यंगों के उत्तेजक विचार उथल-पुथल मचाते रहते हैं, ऐसे पुरूषों को धात दुर्बलता का शिकार होना पड़ता है या फिर पड़ सकता है।

धातु दुर्बलता के मुख्य लक्षण-

1. सदा उदास रहना।

2. पूरे शरीर में पीड़ा होना।

3. मुख के अंदर सूखापन होना।

4. अकारण थकावट होना।

5. शरीर दिन-पर-दिन पीला होते जाना।

6. खिन्न चेहरा।

7. किसी काम में मन न लगना।

8. इन्द्रियों की कमजोरी।

9. शोष।

10. खांसी।

11. नपुंसकता।

12. वीर्य में वीर्यकीटों का कम होना।

13. अण्डकोषों में दर्द होना।

14 संभोग की इच्छा कम होना आदि लक्षण होते हैं।

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सहायक चिकित्सा- रोगी के आहार में आम, केला, कटहल, कच्चा नारियल, नारियल का पानी, तरबूज, बड़ बेर, खिरनी, कमलगट्ठा, सिंघारा, महुआ के फूल, अनार, पिण्ड-खजूर, छुआरा, बादाम, सेब, अखरोट, गाय का दूध, मलाई, खांड, दही, मक्खन, घी आदि हितकर हैं।

धात दुबर्लता का देसी व आयुर्वेदिक उपचार-

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1. मल्लसिन्दूर 60 से 120 मि.ग्रा. सुबह-शाम अदरक रस और शहद के साथ लेने से शरीर हृष्ट-पुष्ट हो जाता है और बल-वीर्य की वृद्धि होती है। मैथुन की क्षमता प्राप्त होती है।

2. कामिनी विद्रावण रस 1 गोली प्रतिदिन रात को मिश्री मिले दूध के साथ लें। इससे वीर्य गाढ़ा हो जाता है और स्तम्भन शक्ति की वृद्धि होती है।

3. पंचामृत रस 1-1 गोली सुबह-शाम बनतुलसी के पत्तों के रस एवं दूध अथवा शहद के साथ दें। इससे शुक्रक्षय से उत्पन्न कमजोरी तथा धात का पतलापन दूर हो जाता है।

4. पुष्प धन्वा रस 1-1 गोली प्रति मात्रा सुबह-शाम मिश्री मिले दूध या मिश्री मिले मक्खन के साथ दें, चमत्कारिक लाभ होगा।

5. अगस्त्य हरीतकी 1 हरड़ प्रति मात्रा सुबह-शाम गर्म जल या गर्म दूध के साथ सेवन करायें। वीर्य गाढ़ा करने एवं संभोग आनंद प्रदान करने वाली अद्भुत योग है।

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6. अमृतप्राशाबलेह प्रति मात्रा 5 से 10 ग्राम गाय या बकरी के दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करने से शुक्रक्षयजनित सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। यह एक उत्तम पौष्टिक योग है।

7. कामेश्वर मोदक 1 से 3 ग्राम सुबह के समय रोजाना गाय के दूध के साथ सेवन करने से वीर्य की वृद्धि होती है। वीर्य स्तम्भन एवं बुद्धि की वृद्धि होती है।

8. मूसली पाक 6 से 10 ग्राम की मात्रा में दूध या जल के साथ सेवन करने से धात क्षीणता, धातु दुर्बलता आदि ठीक हो जाते हैं। कामशक्ति की वृद्धि होती है और समस्त वीर्य दोष व विकार दूर हो जाते हैं।

9. गुरूच सत्व आधा से एक ग्राम शहद में मिलाकर सुबह-शाम चटायें

10. बेल की जड़(बिल्व मूल) की छाल को जीरे के साथ पीसकर घृत मिलाकर सुबह-शाम पीने से वीर्य का पतलापन दूर हो जाता है।

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11. छोटी माई का चूर्ण सुबह-शाम 2 से 4 ग्राम सेवन करने से वीर्य का पतलापन दूर हो जाता है।

12. शतावरी चूर्ण 10 से 20 ग्राम दूध के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से आशातीत लाभ होता है।

13. सिस्सि(सिरस) के बीजों का चूर्ण 2 ग्राम प्रति मात्रा सुबह-शाम सेवन करने से वीर्य गाढ़ा हो जाता है।

14. आहार में मखाने की खीर नियमित रूप से खाने से वीर्य की कमी और वीर्य का पतलापन में लाभ होता है।

15. 2 से 4 पिण्ड खजूर प्रतिदिन दूध में उबाल कर खजूर खाने के बाद दूध पी लें। आशातीत लाभ होगा।

16. काहू के बीजों का चूर्ण 1 से 3 ग्राम सुबह-शाम मिश्री मिले दूध के साथ सेवन करने से वीर्य गाढ़ा हो जाता है।

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