Dhat Rog Me Upyogi Ayurvedic Chikitsa धात रोग में उपयोगी आयुर्वेदिक चिकित्सा

Dhat Rog Me Upyogi Ayurvedic Chikitsa धात रोग में उपयोगी आयुर्वेदिक चिकित्सा

धात गिरने की समस्या (Spermatorrhea)

मानसिक या शारीरिक स्थिति अनुकूल नहीं होने से शरीर में वीर्य का निर्माण कम हो जाता है। यदि निर्माण होता भी है, तो पतला होता है। इस स्थिति में वीर्य के पतलेपन के कारण मल-मूत्र करते समय मामूली-सा जोर लगाने पर वीर्य जैसा पदार्थ निकल जाता है। यही वीर्य क्षरण या धात रोग है।

आयुर्वेदिक उपचार- 

1. शुद्ध शिलाजीत 60 ग्राम, अभ्रक भस्म 12 ग्राम, लौह भस्म 12 ग्राम, स्वर्ण माक्षिक भस्म 12 ग्राम, बंग भस्म 12 ग्राम, अम्बर भस्म 3 ग्राम।

उपरोक्त सभी औषधियों को खरल में डालकर त्रिजात के क्वाथ में तीन दिन तक खरल करके 250 मि.ग्रा. शक्ति की गोलियों का निर्माण कर लें। एक गोली रात को सोते समय कपूर 62 मि.ग्रा. तथा 500 मि.ग्रा. खुरासानी अजवाइन के साथ सेवन करने के उपरान्त गुनगुना दूध पीने का निर्देश दें। यह वीर्य प्रमेह, स्वप्नदोष तथा नपुंसकता को नष्ट करने के लिए बेजोड़ उपयोग योग है।

Dhat Rog Me Upyogi Ayurvedic Chikitsa

2. शुद्ध शिलाजीत 96 ग्राम, लौह भस्म 24 ग्राम, अभ्रक भस्म 12 ग्राम, बंग भस्म 6 ग्राम।

उपरोक्त तीनों को भस्मों को काले खरल में डालकर एक करें और उसमें शुद्ध किया हुआ गीला शिलाजीत डालकर खूब घोटें। खूब घुट जाने के बाद 125 मि.ग्रा. की गोलियां बना लें। 1-1 गोली दिन में 2 बार अथवा आवश्यकतानुसार दूध के साथ प्रयोग करने का निर्देश दें। तीव्र अवस्था होने पर 2-2 गोली दिन में 2 बार अथवा आवश्यकतानुसार प्रयोग करने के लिये दें। चिकित्सा 2-3 माह तक जारी रखें। यह गोली धात गिरना, स्वप्नदोष, पीलिया-पांडु, रक्ताल्पता, अग्निमांद्य, शुक्रस्राव, नपुंसकता, दूर कर, रोगी को शक्तिशाली बना देती है। इस गोली को सेवन करने के पूर्व रोगी की आंतें शुद्ध करें। आंतें साफ रहने से यह गोली अधिक लाभ प्रदान करती है।

3. शुद्ध कुचला 24 ग्राम, जावित्री 4 ग्राम, लौंग 4 ग्राम, अफीम 4 ग्राम, केसर 3 ग्राम, सफेद मिर्च डेढ़ ग्राम, कस्तूरी एक ग्राम, अम्बर 500 मि.ग्रा.।

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Dhat Rog Me Upyogi Ayurvedic Chikitsa

उपरोक्त समस्त औषधियां एक करके भली-भांति कूट-पीसकर कपड़छान कर लें। उसके पश्चात् पान के रस में 6 घण्टे तक घोटकर 125 मि.ग्रा. शक्ति की गोलियों का निर्माण कर लें। यह गोली बहुत उपयोगी, असरकारक एवं श्रेष्ठ प्रभावयुक्त होती है। इसका असर तीव्रता के साथ होता है। यह गोली वीर्य प्रमेह, नपुंसकता, स्वप्नदोष आदि दूर करके रोगी को शक्तिशाली बना देती है। 1-1 गोली दिन में 2 बार अथवा आवश्यकतानुसार गाय के दूध के साथ प्रयोग करने का निर्देश दें। अति तीव्र गंभीर अवस्था होने पर पीड़ित रोगी को 2-2 गोली दिन में 2 बार अथवा आवश्यकतानुसार प्रयोग करने का निर्देश दें।

4. गोदंती डेढ़ ग्राम, शतावर 2 ग्राम, शिलाजीत शुद्ध एक चैथाई ग्राम।

उपरोकत तीनों को एक कर लें। यह एक मात्रा है, जो वीर्य प्रमेह के रोगी को दी जाती है। इसके प्रयोग से धात गिरना की समस्या का अंत होता है। यह योग रोजाना दिन में 2 बार प्रयोग करने के लिए पीड़ित रोगी को दें। चिकित्सा 40 दिन तक लगातार जारी रखें। पूर्ण लाभ न हो तो 5-10 दिन विश्राम देने के पश्चात् उपरोक्त मात्रा का दूसरा 40 दिन का कोर्स पुनः प्रारम्भ करें।

5. मुलहठी 140 ग्राम, सालब मिश्री 140 ग्राम, शतावर 140 ग्राम, छोटी इलायची दाना 20 ग्राम, दालचीनी 20 ग्राम, तबाशीर, 20 ग्राम, कलई धात 4 ग्राम, चांदी के वर्क 60 ग्राम।

उपरोक्त सभी औषधियांे को पृथक-पृथक कूट-पीसकर छान लें और आपस में मिलाकर उसमें चांदी के वर्क मिलाकर 60 पुड़िया बना लें। यह औषधि वीर्य प्रमेह को समूल नष्ट कर, रोगी को स्वस्थ, निरोग, हृष्ट-पुष्ट, बलवान बना देती है। 1-1 खुराक दिन में 2 बार सुबह-शाम गाय के दूध के साथ सेवन करेें। इस औषधि का प्रभाव सर्वोत्तम शक्तिशाली होता है, आवश्यकतानुसार लें।

6. सत गिलोय 10 ग्राम, फिटकरी भुनी हुई 10 ग्राम।

उपरोक्त दोनों औषधियों को लें और दोनों को मिलाकर कूट-पीसकर एक समान कर दें। उसके पश्चात् वीर्य प्रमेह यानी धात गिरने की समस्या से ग्रस्त रोगी को 3 ग्राम सुबह-शाम 2 सेवन करने का निर्देश दें। यह अति पुराना जीर्ण वीर्य प्रमेह भी नष्ट कर देने वाला अक्सीर योग है। इसके प्रभाव से रोगी शीघ्र स्वस्थ व निरोग हो जाता है।

7. गेरू 6 ग्राम, भुनी हुई फिटकरी 10 ग्राम।

उपरोक्त दोनों औषधियों को घोंट-पीसकर एक जान कर लें। इसे वीर्य प्रमेह में प्रयोग करने के लिए दें। यह योग निश्चय ही रोगी को स्वस्थ व निरोग कर देता है। इसकी मात्रा एक ग्राम की होती है। यह एक मात्रा दूध की लस्सी के साथ प्रयोग करने के लिए दें। कुछ दिन के प्रयोग के पश्चात् यदि मल के अंदर लालिमा नजर आने लगे तो यह रोगी के स्वस्थ हो जाने की पक्की निशानी है। उसके पश्चात् दवा देना बंद करा दें।

8. चूनिया गोंद 10 ग्राम, मैदा लकड़ी 10 ग्राम, तमर हिंदी के बीज की गिरी।

उपरोक्त तीनों औषधियां प्राप्त करके बारीक पीसकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण सुबह के समय सेवन करने के लिए रोगी को दें। दूध के साथ देना उत्तम फलदायक है। यह वीर्य प्रमेह को समूल नष्ट कर, रोगी को स्वस्थ कर देने वाला उत्तम योग है।

9. सेमल की छाल 10 ग्राम, धतूरा के बीज 10 ग्राम, समुद्र सोख 10 ग्राम, मूसली सफेद 10 ग्राम, काली मिर्च 10 ग्राम, मैदा लकड़ी 10 ग्राम, ब्रह्मदण्डी 20 ग्राम, रेग माही 20 ग्राम, शंखाहुली 20 ग्राम, कुलंजन 20 ग्राम, भांग के बीज 20 ग्राम, मस्तंगी 20 ग्राम।

Spermatorrhea Treatent in Hindi

उपरोक्त समस्त औषधियां एकत्र करें और कूट-पीसकर एक कर लें। यह चूर्ण अतिशय गुणकारी परम परोपकारी सिद्ध है। इसके प्रभाव से वीर्य प्रमेह नष्ट हो जाता है। इसके प्रयोग से नपुंसकता का भी नाश होता है। वीर्य प्रमेह नष्ट होते ही रोगी के अंदर बल, कांति, ओज उत्पन्न होने लगता है। 30 ग्राम की एक मात्रा दिन मे 1-2 बार दूध के साथ प्रयोग करने का निर्देश दें।

10. महुआ की छाल 6 माशा, काली मिर्च 4 रत्ती-

ये दोनों पीसकर एक कर लें। सिल पर पीसना उचित है। पीसते समय बंूद-बूंद जल मिलाते जायें। यह एक मात्रा है। इसको पानी के साथ देने से असाध्य प्रमेह भी नष्ट हो जाता है। वीर्य प्रमेह नष्ट होते ही रोगी के अंदर बल व चमक आने लगती है।

11. मुलहठी डेढ़ ग्राम, गुलनार 3 ग्राम, काहू के बीज 4.5 ग्राम, सम्भालू के बीज 5 ग्राम।

उपरोक्त सभी औषधियां साफ-सुथरी एकत्र करें और कूट-पीसकर छान लें। यह चूर्ण धात गिरने की समस्या के लिए अतिशय गुणकारी सिद्ध है। इसका प्रभाव सर्वोत्तम उच्चकोटि का होता है। 6 माशा की मात्रा सुबह निराहार जल के साथ सेवन करने का निर्देश दें। चिकित्सा 2-3 तीन सप्ताह जारी रखें।

12. गिलोय 125 ग्राम, आंवला 125 ग्राम, गोखरू 125 ग्राम।

ये तीनों औषधियां कूट-पीसकर छान लें। यह औषधि वीर्य प्रमेह(धात गिरना) की चिकित्सा के लिए लाभदायक सिद्ध है। इसके प्रभाव से वीर्य प्रमेह समूल नष्ट हो जाता है। 6 माशा चूर्ण, माशा घी और 3 माशा शहद के साथ सुबह के समय सेवन करने का निर्देश दें। यह प्रमेह को पूरी तरह नष्ट करके रोगी के शरीर में बल वीर्य, कांति उत्पन्न कर देता है।

Dhat Rog Me Upyogi Ayurvedic Chikitsa

13. हरड़ 2 ग्राम, बहेड़ा 2 ग्राम, मुलहठी 2 ग्राम, शतावर 2 ग्राम, गिलोय 2 ग्राम, सफेद मूसली 2 ग्राम, स्याह मूसली 2 ग्राम, नाग केसर 2 ग्राम, बिदारीकंद 2 ग्राम, आंवला 2 ग्राम।

उपरोक्त सभी औषधियां को कूट-पीसकर छान लें। यह अतिशय लाभदायक सिद्ध योग है। इसके प्रयोग से वीर्य प्रमेह समूल नष्ट हो जाता है। 6 माशा चूर्ण, 6 माशा घी तथा 2 माशा शहद के साथ सुबह के समय सेवन करें। यह वीर्य प्रमेह को नष्ट कर, रोगी के शरीर में शक्ति का संचार करने लगता है। चिकित्सा एक माह या आवश्यकतानुसार समय तक जारी रखें।

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