Dhat Rog Ke Liye Ramban Desi Ayurvedic Upchar

Dhat Rog Ke Liye Ramban Desi Ayurvedic Upchar

धात रोग के लिए रामबाण देसी आयुर्वेदिक उपचार

धातु गिरना(शुक्रमेह)-

अनैच्छिक रूप से वीर्य का स्वतः ही निकल जाना धातु गिरना कहलाता है, जिसे शुक्रमेह भी कहते हैं। इस समस्या में रोगी द्वारा मल-मूत्र के दौरान हल्का सा भी जोर लगाने पर वीर्य निकल जाता है। अगर धातु रोग के कारणों के बारे में बात की जाये, तो जो कारण स्वप्नदोष के होते हैं, वही ‘धात जाना’ की समस्या के होते हैं।

शुक्रमेह की समस्या क्या है?

कामेच्छा जागृत होने पर पुरूष के शिश्न में तनाव आने के कारण शिश्न में से बहुत कम मात्रा में पानी के रंग की पतली-सी लेस निकलती है। जोकि इतनी कम मात्रा में होती है कि बाहर नहीं आती। मगर जब काफी अधिक समय तक पुरुष का शिश्न उत्तेजित अवस्था में रहता है और वह संभोग भी नहीं करता है, तब इस स्थिति में यह लेस शिश्न के मुख तक पहुंच जाती है। इसे मजी (Prostatic Secretion) कहते हैं।
यह जो लेस होती है, इसमें शुक्राणुओं का जरा भी अंश नहीं होता है। प्रकृति ने इसका निर्माण केवल इसलिए किया है, ताकि संभोग के दौरान पुरूष शिश्न की नली में गीलापन आ जाये, जिससे शारीरिक संबंध के दौरान शिश्न को कोई हानि न पहुंचे।

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वीर्य प्रमेह, शुक्रमेह की उपयोगी आयुर्वेदिक चिकित्सा-

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1. कौंच के बीज 10 ग्राम, खीरे के बीज 10 ग्राम, बीजबंद 10 ग्राम, छिद्रहीन मोती 10 ग्राम, ऊट कंकारा की जड़ 6 ग्राम, आक की जड़ 6 ग्राम, काहू 10 ग्राम, केसर 10 ग्राम, जिल्दबेदस्तर 6 ग्राम।

उपरोक्त औषधियां प्राप्त कर घोंट-पीसकर एक कर लें। उसके पश्चात् उसमें पान का रस मिलाकर 4 ग्राम दूध के साथ प्रयोग करने का निर्देश दें। इस योग के प्रयोग से वीर्य प्रमेह नष्ट हो जाता है। सर्दी के दिन के लिए यह अति उपयोगी योग है। इसके प्रभाव से नपुंसकता का भी नाश हो जाता है।

2. भांग के बीज 100 ग्राम, काहू के बीज 100 ग्राम, धतूरा के बीज 100 ग्राम, मीठे बादाम की गिरी 30 ग्राम, सूखा सिंघाड़ा 10 ग्राम, खसखस 10 ग्राम, इमली के बीज 10 ग्राम।

उपरोक्त सभी औषधियों को घोट-पीसकर एक कर लें। जब सभी बारीक पिस जायें, तब उन सभी के वजन का आधा वजन मिश्री मिलाकर पुनः घोट कर एक कर लें। यह योग अति लाभदायक सिद्ध होता है। इसका प्रभाव वीर्य प्रमेह पर तीव्र गति से होता है और रोगी स्वस्थ, निरोग, बलवान, कांतिवान हो जाता है। 1-2 ग्राम की मात्रा गाय के दूध के साथ पीड़ित रोगी को प्रतिदिन सेवन करने का निर्देश दें। यह मात्रा एक-दो सप्ताह तक प्रयोग करने से ही वीर्य प्रमेह नष्ट हो जाता है। वीर्य प्रमेह के अलावा यह नपुंसकता, स्वप्नदोष, वीर्य की कमी, वीर्य के दोषों आदि के लिए भी सर्वोत्तम लाभ देता है।

3. ककहिया 50 ग्राम, कौंच के बीज 50 ग्राम, बरियारा की जड़ 50 ग्राम, शतावर 50 ग्राम, गोखरू 50 ग्राम, तालमखाना 50 ग्राम।

उपरोक्त सभी औषधियों को एकत्र कर, कूट-पीस कर छान लें। यह औषधि प्रयोग कराने से प्रमेह पीड़ित रोगी स्वस्थ-निरोग, बलवान हो जाते हैं। यह नपुंसकता, स्वप्नदोष भी दूर कर देने वाला उपयोगी योग है। 6 ग्राम दूध के साथ प्रयोग करने का निर्देश दें। इस औषधि को प्रातःकाल सेवन करायें। गाय के दूध के साथ प्रयोग करना हितकर है।

4. गुलमुंडी 15 ग्राम, सिंघाड़ा 15 ग्राम, कमरकस 15 ग्राम, तालमखाना 15 ग्राम, बीजबंद 15 ग्राम, शतावर 15 ग्राम, शकाकुल मिस्री 15 ग्राम, मोचरस 15 ग्राम, सरवाली 15 ग्राम, गोंद बबूल 15 ग्राम, गोंद सेमल 15 ग्राम, उड़द की दाल 15 ग्राम, इमली बीज 15 ग्राम, बबूल के फूल 15 ग्राम, धाय के फूल 15 ग्राम, चीनी(उपरोक्त सभी औषधियों के बराबर)।

यह अति उपयोगी, असरकारक एवं श्रेष्ठ प्रभाव उत्पन्न करने वाला योग है। इसकी प्रबल प्रभावशक्ति से पीड़ित रोगी शीघ्र स्वस्थ-निरोग हो जाता है। इसका असर तेजी से होने लगता है। गाय के दूध के साथ सेवन करने का निर्देश दें। इसकी मात्रा 10-15 ग्राम प्रतिदिन की होती है। प्रयोग योग्य बनाने के लिए उपरोक्त सभी औषधियों को एकत्र करें और कूट-पीसकर छान लें और साफ-सुथरी शीशी में भरकर रख लें। इसी चूर्ण में से ऊपर लिखी मात्रा प्रयोग करायी जाती है।

5. पाषाण भेद 15 ग्राम, मुलहठी 15 ग्राम, सत गिलोय 15 ग्राम, शिलाजीत 15 ग्राम, बंशलोचन 15 ग्राम, छोटी इलायची 15 ग्राम, तालमखाना 15 ग्राम, कुश्ता कलई 15 ग्राम, श्वेत मिस्री(उपरोक्त सभी औषधियों के बराबर।)

ये सभी औषधियां एकत्र कर, भली-भांति कूट-पीसकर एक जान कर लें और छानकर एक साफ-सुथरी शीशी में भरकर बंद कर दें। यह चूर्ण अति उपयोगी, असरकारक एवं श्रेष्ठ प्रभाव उत्पन्न कर वीर्य प्रमेह को नष्ट कर देता है। वीर्य प्रमेह नष्ट हो जाने के उपरान्त रोगी बलवान, हृष्ट-पुष्ट हो जाता है। यह चूर्ण 10 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन 1-2 बार अथवा आवश्यकतानुसार दूध के साथ प्रयोग करने के लिए दिया जाता है।

Dhat Rog Ke Liye Ramban Desi Ayurvedic Upchar

6. सफेद मूसली 20 ग्राम, स्याह मूसली 20 ग्राम, तवाखीर 20 ग्राम, कमल गट्टे की गिरी 20 ग्राम, काली मिर्च 20 ग्राम, लौंग 20 ग्राम, सफेद चंदन 20 ग्राम, छोटी इलायची 20 ग्राम, चिरोंजी 20 ग्राम, छुहारा 20 ग्राम, बादाम 20 ग्राम, सफेद जीरा 20 ग्राम, स्याह जीरा 20 ग्राम, धनिया 20 ग्राम, सोंठ 20 ग्राम, तज 20 ग्राम, तेजपात 20 ग्राम, पीपर 20 ग्राम, नागरमोथा 20 ग्राम, कौंच के बीज की गिरी 20 ग्राम, शतावर 20 ग्राम, मिस्री एक किलो भार।

उपरोक्त सभी औषधियां एकत्र करें। उसके पश्चात् उन सभी को कूट-पीसकर छान लें और महीन पिसी हुई मिस्री में मिलाकर एक जान करके एक साफ-सुथरी शीशी में बंद करके रख लें। यह चूर्ण अति उत्तम फलदायक होता है। इसके प्रभाव से वीर्य प्रमेह नष्ट हो जाता है। वीर्य प्रमेह नष्ट हो जाने से रोगी का बल बढ़ने लगता है। 10 ग्राम प्रातःकाल सेवन करने के उपरान्त ऊपर से गाय का दूध पीने का निर्देश दें। इसकी प्रभाव शक्ति प्रबल शक्तिशाली होती है।

7. बिना बीज वाली बबूल की फली 1 ग्राम, तालमखाना 6 ग्राम, बीज बंद 3 ग्राम, मिस्री साढ़े 3 ग्राम।

यह अति उपयोगी असर दिखाने वाला योग है। इसके प्रभाव से वीर्य प्रमेह नष्ट हो जाता है। उपरोक्त सभी औषधियों को कूट-पीसकर भली-भांति छान लें और एक साफ-सुथरी शीशी में भरकर रख लें। इसकी मात्रा 6 ग्राम तक की होती है। प्रातःकाल 6 ग्राम चूर्ण सेवन करने के उपरान्त गाय का दूध पीने का रोगी को निर्देश दें। यह धातु रोग की समस्या को नष्ट कर, रोगी को बलवान बना देने वाला गुणकारी योग है।

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