Dhat Rog Ke Karan Lakshan Aur Desi Gharelu Upchar

Dhat Rog Ke Karan Lakshan Aur Desi Gharelu Upchar

धात रोग के कारण लक्षण और देसी घरेलू उपचार

वीर्य प्रमेह, शुक्रमेह, धात रोग-
(Spermatorrhoea)

वीर्य प्रमेह को शुक्रमेह के अलावा जरयान नाम से भी संबंधित किया जाता है। बिना इच्छा के अथवा बिना किसी लैंगिक उत्तेजना के जब मल-मूत्र त्याग करते समय वीर्य निकलता है, तब उस अवस्था को वीर्य प्रमेह या धात रोग कहा जाता है। धात गिरने की समस्या ज्यादातर उन व्यक्तियों को होती है, जो बचपन से ही बुरी संगति में पड़कर अपने वीर्य का नुकसान करने लग जाते हैं। बचपन से ही वीर्यनाश होते रहने से प्रजननांग कमजोर, असहाय तथा शिथिल पड़ जाते हैं। जिसका फल यह निकलता है कि वीर्य धारण करने का बल क्षीण हो जाता है। धारण बल न रहने से शुक्र असमय मल-मूत्र का दबाव पड़ते ही निष्कासित हो जाता है। बचपन से ही हस्तमैथुन की बुरी आदत में पड़ जाना धातु गिरने की समस्या का मुख्य कारण माना जाता है।

आयुर्वेदानुसार मिथ्या आहार-विहार के परिणामस्वरूप जब वात, पित्त और कफ दूषित होकर चिकने गाढ़े, श्वेत, लेसदार, मलों को साथ लेता हुआ मूत्र जब अनेक रूपों और रंगों में शरीर से बाहर निकलता है, तब उस अवस्था को ‘प्रमेह’ कहा जाता है।

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धात रोग के कारण-

1. बचपन से अनमोल वीर्य को नष्ट करने की आदत।

2. वीर्य धारण करने की शक्ति कमजोर हो जाना।

3. अत्यधिक उत्तेजक खाद्य-पेय का अधिक इस्तेमाल करना।

4. प्रजननांगों की दुर्बलता-कमजोरी।

5. अत्यधिक हस्तमैथुन करना।

6. कब्ज़ की शिकायत रहना।

7. पाचन संबंधी विकार होना।

8. अत्यधिक स्त्रियों के साथ मैथुन करना।

9. आहार-विहार दूषित हो जाना।

10. अधिक समय तक सोना।

11. परिश्रम का अभाव होना।

12. खटाई और खटाई युक्त तीखे खाद्य-पेय प्रयोग करना।

13. अत्यधिक सिगरेट-तम्बाकू का प्रयोग।

14. अत्यधि मदिरापान करना।

15. वात, पित्त तथा कफ प्रकुपित हो जाना।

16. ब्लू फिल्में देखना, अश्लील गंदी पुस्तकें पढ़ना।

17. अप्राकृतिक मैथुन करना।

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प्रमुख लक्षण-

धातु रोग के प्रमुख लक्षण नीचे सविस्तार उल्लेख किये जा रहे हैं, जो इस प्रकार है-
1. मल-मूत्र त्याग करते समय बिना किसी उत्तेजना के वीर्य निकलते रहना इस रोग का मुख्य लक्षण है, जिससे इस रोग को स्पष्ट पहचाना जा सकता है।

2. रोगी चिंताजनक अवस्था में रहने लगता है।

3. रोगी मन किसी भी कार्य में सही से नहीं लग पाता।

4. गले में हल्के दर्द की शिकायत रहती है।

5. अरूचि से पीड़ित होने लगता है, जिससे भोजन की इच्छा समाप्त हो जाती है।

6. रोगी में नींद का अभाव हो जाता है।

7. आये दिन कब्ज़ की शिकायत बनी रहती है।

8. पाचन विकार से परेशानी आने लगती है।

9. सिर में दर्द बना रहता है।

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10. रोगी को प्यास भी बहुत ज्यादा लगती है।

11. हल्की व साधारण सी रगड़ खाने से भी वीर्य निष्कासित हो जाता है।

12. कई रोगी ज्वर रहने की शिकायत करते हैं।

13. रोगी घबराहट अनुभव करता है, इत्यादि कई लक्षण होते हैं।

धातु रोग में आयुर्वेदिक व घरेलू उपाय-

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1. सफेद मुसली का प्रयोग धातु और स्नायु की दुर्बलता में बड़ा ही लाभदायक है। इसलिए धातु दुर्बलता को पूरी तरह दूर करने के लिए रोजाना 10 ग्राम सफेद मुसली का चूर्ण, देशी गाय के दूध के साथ लगातार सेवन करें। इससे धातु रोग पूरी तरह ठीक हो जाता है।

2. तुलसी भी इस रोग में बहुत उपयोगी साबित होती है। इसके लिए तुलसी की जड़ को भली-भांति सुखाकर बारीक पाउडर यानी चूर्ण की तरह कर लें। इस तैयार चूर्ण की एक ग्राम की मात्रा लेकर 1 ग्राम अश्वगंधा के पाउडर में मिश्रण करके सेवन करें। इसके बाद ऊपर से दूध पी जायें। बहुत ही कारगर उपाय है।

3. तुलसी के बीज 5 ग्राम ले लें और इसे मिश्री के साथ अच्छे से कूट-पीसकर रोजाना दोपहर के भोजन के बाद सेवन करें। धातु रोग की समस्या देखते ही देखते छू मंतर हो जायेगी।

4. पका पपीता खायें या फिर पपीते का जूस एक गिलास भरकर पीयें। इसके प्रयोग से धातु की दुर्बलता तो दूर होगी ही, साथ ही यह योग पेट को भी साफ रखेगा और कब्ज भी दूर होगी।

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5. थोड़ी इलायची(छोटी) लें और अच्छे सेकी हुई हींग ले लें। इनकी तीन ग्राम चूर्ण में दूध मिलाकर पीने से पेशाब के साथ धात गिरने की समस्या से छुटकारा मिल जाता है।

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6. उड़द की दाल लेकर भली-भांति पीस लें। फिर इसे गाय की घी में भून लें और उसे खांड में मिश्रण करनके खाने से बेहद आराम मिलता है और इससे सेक्स पाॅवर भी बढ़ता है।

7. आँवले के जूस में शहद की 2 चम्मच मात्रा लेकर पीने से धातु जाने की समस्या में बहुत आराम पहुंचता है।

8. एक गिलास गर्म दूध में आँवलें का चूर्ण मिलाकर प्रतिदिन पीने से धातु गिरना समाप्त हो जाता है।

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