Dhat Rog Ke Karan, Lakshan Aur Desi Ayurvedic Upay

Dhat Rog Ke Karan, Lakshan Aur Desi Ayurvedic Upay

धात रोग के कारण, लक्षण और देसी आयुर्वेदिक उपाय

पुराने से पुराने धात रोग की भी कर देगें छुट्टी ये नुस्खे-

आज की आधुनिक लाइफ स्टाई वाले दौर में कुविचार और अश्लीलता में बहुत ज्यादा बढ़ोत्तरी होने के कारण वर्तमान में नौजवान पुरूष और स्त्रियां अपना अधिकतर समय अश्लील फिल्में देखने और कामुक साहित्य पढ़ने में व्यतीत करने लगे हैं। ऐसे में उनके दिमाग में हर वक्त सेक्स ही छाया रहता है, जिस कारण वे अप्राकृतिक तरीके से अपने वीर्य और रज को नष्ट करते रहते हैं। कामुकता अधिक बढ़ जाने पर आज के युवा और युवतियां अपनी काल्पनिक दुनियां में ही संभोग क्रिया को अंजाम देते हुए करते हुए आनंद विभोर होने लगते हैं।

इसी अश्लीलता और कामुक विचारधारा के कारण उनके शिश्न में तनाव बना रहता है और पतला पानी जैसा द्रव्य बहुत अधिक मात्रा में बहना आरंभ हो जाता है। यही प्रक्रिया जब बार-बार होने लगती है, तो एक दिन स्थिति ऐसी भी हो जाती है कि किसी सुंदर लड़की या स्त्री को देखने मात्र से ही पुरूष के शिश्न में से वीर्य निष्कासित हो जाता है। ये एक प्रकार का रोग है, जिसे शुक्रमेह(धातु रोग) कहते हैं।

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इस रोग में लिंग में से निकलने वाले द्रव्य में यूं तो वीर्य का कोई भी अंश देखने को नहीं मिलता है! मगर इसका मुख्य कार्य पुरुष यौनांग की नाली को चिकनाईयुक्त और गीला करने का होता है, ताकि संभोग के दौरान वीर्य की गति से होने वाली हानि से शिश्न सुरक्षित रह सके।

धात रोग के मुख्य कारण-

Dhat Rog Ke Karan, Lakshan Aur Desi Ayurvedic Upay

1. हर वक्त उत्तेजक और कामुक विचार धारा में खोये रहना।

2. मन में अशांति का वास होना।

3. कोई गहरा दुख होना।

4. मानसिक दुर्बलता।

5. बाॅडी में पोषक तत्वों व विटामिन्स की बहुत ज्यादा कमी होने से।

6. किसी पुराने रोग के लिए बहुत समय से दवा लेते रहने पर व्यक्ति(रोगी) शारीरिक रूप से अति दुर्बल हो जाता है और उसकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर हो जाती है।

7. लिंग के नसों की कमजोरी और अत्यधिक हस्तमैथुन करना।

धात रोग के लक्षण-

1. व्यक्ति मल-मूत्र त्याग करे और इस दौरान यदि उसे दबाव की इच्छा महसूस हो, तो ये लक्षण धात रोग का है।

2. शिश्न के मुख द्वार से लार का टपकना।

3. वीर्य अत्यधिक पतला होकर पानी की तरह दिखना।

4. शारीरिक रूप से कमजोरी महसूस होना।

5. मामूली-सी बात को लेकर चिंता करना।

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6. बाॅडी में कंपकपी होना या कमजोरी के कारण हाथ-पैरों का कांपना।

7. पेट रोग की समस्या रहना जैसे-कब्ज, पेट सही से साफ न रहना।

8. श्वास संबंधित समस्या होना या खांसी होना।

9. थोड़ा बहुत या फिर अधिक मात्रा में चक्कर आना।

10. हर वक्त आलस्य और थकावट रहना।

धात रोग के आयुर्वेदिक उपाय-

गिलोय : 2 चम्मच गिलोय के रस में 1 चम्मच शहद मिलाकर सेवन करने से धातु रोग की समस्या से छुटकारा मिल जाता है।

आंवला : धातु को मजबूत, गाढ़ा और स्वस्थ रखने के लिए रोजाना रोगी को खाली पेट सुबह के समय दो चम्मच आंवले के रस में शहद की जरा-सी मात्रा मिलाकर दें। दूसरे उपाय में आंवले के चूर्ण को दूध में मिलाकर लेने से धातु गिरने की समस्या में बहुत फायदा पहुंचता है।

तुलसी : धातु जाने की समस्या में शीघ्र लाभ पाने के लिए दोपहर का भोजन करने के बाद 3 से 4 ग्राम तुलसी के बीज और जरा-सी मिश्री दोनों का मिश्रण करके सेवन करें।

मुसली : धातु जाने की समस्या को दूर करने के लिए 10 ग्राम सफेद मुसली का चूर्ण में मिश्री मिलाकर सेवन करें और ऊपर से लगभग आधा किलो ग्राम गाय का दूध पी लें। इस योग से शारीरिक कमजोरी से भी दूर होगी और रोग-प्रतिरोधक क्षमता में भी वृद्धि होती है।

उड़द की दाल : उड़द की दाल को अच्छे से कूट-पीसकर इसे खांड में भुन लें और खांड में मिलाकर सेवन करने से गजब का लाभ शीघ्र ही प्राप्त होता है।

जामुन की गुठली : जामुन की गुठलियों को भली-भांति तेज धूप में सुखाकर उसका बारीक चूर्ण कर लें और उसे नित्य दूध के साथ सेवन करें। कुछ ही दिनों में आपका धात गिरना बंद हो जायेगा।

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कौंच के बीज : यदि वीर्य में पतलापन है, तो 100-100 ग्राम की मात्रा में ड्राईफ्रूट्स और कौंच के बीज लेकर उन्हें अच्छे से कूट-पीसकर उनका पाउडर बना लें और फिर उसमें 200 ग्राम पीसी हुई मिश्री मिला लें।
अब इस तैयार मिश्रण को प्रतिदिन रोगी को आधा चम्मच गुनगुने दूध में मिलाकर रोगी को पिलायें, शीघ लाभ पहुंचेगा।

शतावरी मुलहठी : 25 ग्राम शीतलचीनी, 25 ग्राम बंशलोचन, 25 ग्राम छोटी इलायची के बीज, 50 ग्राम मुलहठी और 4 ग्राम बंगभस्म, 50 ग्राम सालब मिसरी लेकर इन सभी सामग्रियों को अच्छे से सुखाकर एकदम बारीक पीस लें। पीसने के बाद इसमें 60 ग्राम चाँदी का वर्क मिलाएं और प्राप्त चूर्ण को(60 ग्राम ) सुबह-शाम गाय के दूध के साथ लें।

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