Dhat Ki Dawa Bataye

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धात रोग किसे कहते हैं?

Spermatorrhoea, Dhatu Rog Treatment, Dhat Syndrome, Prostatic Secretion

बिना सेक्स (Sex) इच्छा, उत्तेजना अथवा बिना नींद के जागे हुए भी लिंग (Penis) से लेसनुमा द्रव्य निकलना धात रोग (Spermatorrhoea) कहलाता है। यह अधिकतर पुरूष के मूत्र त्याग (Urine Discharge) के दौरान थोड़ा सा दबाव बनाने पर मूत्र के साथ वीर्य भी स्वतः निकल जाता है। पुरूष की इस धात गिरना की समस्या को शुक्रमेह रोग भी कहते हैं।
अब ध्यान देने योग्य बात यह है कि धात गिरना की वजह क्या होती है? चलिए आसान तरीके से जानने का प्रयास करते हैं।

धात गिरना की ठोस वजह-

दरअसल कामोत्तना (Sexual Desire) की तीव्रता के कारण पुरूष के लिंग (Peins) में तनाव स्वतः ही आ जाता है, जिस कारण संभोग की इच्छा होने के कारण लिंग के मुख से थोड़ा-थोड़ा लेसनुमा द्रव्य रिसने लता है। अब क्योंकि इस लेस की मात्रा इतनी कम होती है, कि ये लिंग से पूरी तरह बाहर नहीं आ पाती। परन्तु जब लिंग का यह तनाव और उत्तेजना अधिक समय तक रहती है, तो यह लेस, लिंग के मुख तक पहुंच जाती है, जिसे अंग्रेजी में ‘Prostatic Secretion‘ भी कहा जाता है।
यहां बता दें कि लिंग से इस प्रकार बहने वाली लेस में, वीर्य (Semen) का अंश जरा-सा भी नहीं होता है। दरअसल इस रिसने वाले पतले पानी का काम सिर्फ इतना होता है कि ये लिंग की नाली को गीला रखता है, ताकि जब व्यक्ति सेक्स करे और चरम पर पहुंच कर उसका वीर्य तेजी से निष्कासित हो तो लिंग की नसों को कोई हानि ना पहुंचे।

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धात रोग का आयुर्वेदिक इलाज-

Dhat Ki Dawa Bataye

1. धात रोग चाहे कितना ही पुराना अथवा नया हो, इस बताये जाने वाले इलाज की पहली ही मात्रा से दूर हो जायेगा। 3 मात्राओं से पुरूष रोगी बिलकुल ठीक हो जाता है और धात रोग दोबारा नहीं होता। शिंगरफ रूमी (नींबू के रस द्वारा शुद्ध किया हुआ) तथा राड़ी समान मात्रा में लें। राड़ी एक गोल काले रंग के दाने होते हैं, जो अक्सर गेहूँ में से निकलते हैं, इसे पंजाबी में ममनी तथा उर्दू में राड़ी कहते हैं।
इन वस्तुओं को अलग-अलग पीसकर फिर आपस में मिलाकर खूब खरल करें।
यहां तक कि शिंगरफ की चमक समाप्त हो जाये। प्रायः दो दिन में यह योग तैयार हो जाता है। इसे शीशी में रखें। मात्रा 3 से 6 ग्राम तक निर्धारित है। पहली मात्रा दूध के साथ दें। दिन में 3 बार खाने के लिए दूध तथा चावल खाने को दें। दूसरी मात्रा 1 सप्ताह बाद दूध के साथ दी जाये और इसी प्रकार दिन में 3 बार दूध-चावल दें।
फिर तीसरी मात्रा तीसरे सप्ताह दें। खाने को केवल दिन में 3 बार दूध चावल दें। दवा की मात्रा देखकर भयभीत न हों, केवल लाभ पर ध्यान दें।

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2. इमली के बीज 125 ग्राम दूध में भिगो दें, फूलने पर छिलके उतार लें। फिर इन छिली हुई इमली के बीजों को तोल कर खरल में डालकर ऊपर से उतनी ही मिश्री डालकर घोटें। अच्छी प्रकार पिस जाने पर जंगली बेर के समान गोलियां बना लें। सुबह-शाम एक-एक गोली खाने से स्वप्नदोष और धात रोग दूर हो जाता है। गर्म एवं भारी पदार्थों से परहेज करें।

3. जिन लोगों का मसाना कमज़ोर हो और रात्रि को बुरे स्वप्न अथव बिना किसी स्वप्न के वीर्यपात हो जाता हो, उनको जामुन की गुठली का चूर्ण 3-3 ग्राम सुबह-शाम पानी के साथ खाना चाहिए।

4. ईसबगोल की छिलका 3 ग्राम दिन में दो बार दूध के साथ लेने से धात रोग दूर हो जाता है।

5. कीकर की ऐसी फलियाँ जिनमें अभी बीज न पड़ा हो, सुखा कर पीस लें। 6 ग्राम यह चूर्ण और 6 ग्राम कूज़ा मिश्री मिलाकर गाय के दूध के साथ रोगी के खाने को दें, वीर्य प्रमेह, वीर्य का पतलापन दूर हो जाता है।

6. पतले वीर्य को गाढ़ा बनाने वाली नामवर चीजें- मोचरस, दोनों मूसली, सेमर की मूसली, बबूल का गोंद, वंशलोचन, शतावर, मखाने, असगंध, बीजबंद, रूमी मस्तगी, काले तिल, लसौढे, लाजवन्ती के बीज, ईसबगोल की भूसी आद हैं।

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7. मुलेठी 250 ग्राम पीसकर छान लें। 20 ग्राम चूर्ण में 10 ग्राम घी एवं 5 ग्राम शहद मिलाकर सुबह-शाम चाटने तथा ऊपर से पाव भर ताजा दूध पीने से धात रोग की समस्या नहीं रहती है।

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Dhat Ki Dawa Bataye बिना सेक्स (Sex) इच्छा, उत्तेजना अथवा जागे हुए भी लिंग (Penis) से लेसनुमा द्रव्य निकलना धात रोग (Spermatorrhoea) कहलाता है।
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